केजरीवाल का इस्तीफा एक सोची समझी रणनीति का परिणाम है केजरीवाल को आभास हो गया था कि अगर उन्हें लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करके दिखाना है तो अपनी धूमिल होती छवि को और धूमिल होने से बचाना होगा। केजरीवाल को लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए समय की भी अवश्यकता थी। इसलिए उन्होंने जनलोकपाल बिल को दिल्ली विधानसभा मे पास कराने के एवज में अपना इस्तीफा देने की घोषणा कर दी और इस जनलोकपाल बिल को पास कराने के लिए कांग्रेस तथा भाजपा से सहयोग कि मांग भी कर दी आखिर ये पार्टियां अपने पैर पर भला कुल्हाड़ी कैसे मार सकती थी इसलिए केजरीवाल का इस्तीफा देना तो तय था। अब तो यह देखना होगा कि अरविंद केजरीवाल का यह फैसला उन्हें लोकसभा मे कितनी सीटे दिला पाएगा।
Tuesday, 18 February 2014
केजरीवाल का इस्तीफा
केजरीवाल का इस्तीफा एक सोची समझी रणनीति का परिणाम है केजरीवाल को आभास हो गया था कि अगर उन्हें लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करके दिखाना है तो अपनी धूमिल होती छवि को और धूमिल होने से बचाना होगा। केजरीवाल को लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए समय की भी अवश्यकता थी। इसलिए उन्होंने जनलोकपाल बिल को दिल्ली विधानसभा मे पास कराने के एवज में अपना इस्तीफा देने की घोषणा कर दी और इस जनलोकपाल बिल को पास कराने के लिए कांग्रेस तथा भाजपा से सहयोग कि मांग भी कर दी आखिर ये पार्टियां अपने पैर पर भला कुल्हाड़ी कैसे मार सकती थी इसलिए केजरीवाल का इस्तीफा देना तो तय था। अब तो यह देखना होगा कि अरविंद केजरीवाल का यह फैसला उन्हें लोकसभा मे कितनी सीटे दिला पाएगा।
Wednesday, 12 February 2014
यातायात नियमों के पालन मे लापरवाही
हम अक्सर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए यातायात साधनों का
प्रयोग करते है इनमे हम सार्वजनिक साधनों व निजी साधनों का प्रयोग करते है। शहर की
इस भाग-दौड़ भरी जिन्दगीं मे किसी भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को देखने का समय नहीं
हैं। दिल्ली मे अधिक संख्या मे लोग डीटीसी बस का प्रयोग करते है ये बसे पूरी तरह
से भरी रहती है और इन बसों के चालक तो बस को इस तरह से चलाते है मानो कोई ‘स्पोर्टस कार’ चला रहे हों। यही हाल
दिल्ली कि लाईफ लाईन कहीं जाने वाली दिल्ली मेट्रो का है इसके सभ्य यात्री तो इसमे
चढ़ने वाले यात्रियों को मेट्रो से उतरने व उसमें चढने का मौका ही नहीं देते है।
सड़क पर हम स्कूटर,मोटर साईकल और कार चालकों
को धड़ले से यातायात नियमों का उल्घन करते देख सकते हैं। क्योकि शायद वाहन
चालकों को इन यातायात नियमों की कोई परवाह ही नहीं है हर किसी को इतनी जल्दी है कि वह
लाल बत्ती पर रूकना अपने समय कि बर्बादी समझता है और ज़ेबरा क्रॉसिंग से पहले
रूकना तो इन चालकों को आता ही नही या यू कहे कि उनके ब्रेक ज़ेब्रा क्रॉसिंग के
बाद ही काम करते है।
यातायात नियमों का उल्लघंन वाहन चालक ही नही
करते इसमें नियमो का पालन कराने वाले भी भागीदार होते है। क्योंकि वह जब नियम तोड़ने वाले चालक को पकड़ते है तो उस पर दण्ड न लगाकर कुछ रूपये लेकर छोड़ देते
है। इस कृत्य मे पैदल चलने वाले लोग भी शामिल हैं। ये सड़क पार करने के लिये
सबवें,पूल और ज़ेबरा क्रॉसिंग का प्रयोग करना तो आता ही नहीं जहां से थोड़ी जगह दीखी वहीं से सड़क पार कर ली।
इसके कारण ही रोज कोई न कोई सड़क दूर्घटना मे मारा जाता हैं।
सड़क पर होने वाली दूर्घटनाओं का मुख्य कारण सड़क पर पैदल चलने वाले
लोग व वाहन चालकों का यातायात नियमों का पालन न करना है। नियमों का पालन करना हर एक
नागरिक का कर्तव्य साथ ही उसका नैतिक धर्म भी।
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